Wednesday, 26 August 2015

संत कबीर दास के लोकप्रिय दोहे – Kabir Ke Dohe with Meaning in Hindi

 संत कबीर के दोहे – Kabir Ke Dohe

दोहा:- हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना
आपस में दोउ लड़ी-लड़ी  मरे, मरम न जाना कोई।
अर्थ : कबीर दास जी कहते है कि हिन्दुओं को राम प्यारा है और मुसलमानों (तुर्क) को रहमान| इसी बात पर वे आपस में झगड़ते रहते है लेकिन सच्चाई को नहीं जान पाते |
दोहा:- काल करे सो आज कर, आज करे सो अब
     पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगो कब |
अर्थ:- कबीर दास जी कहते हैं कि जो कल करना है उसे आज करो और जो आज करना है उसे अभी करो| जीवन बहुत छोटा होता है अगर पल भर में समाप्त हो गया तो क्या करोगे|

दोहा:- धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय
     माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय|
अर्थ:- कबीर दास जी कहते है कि हमेशा धैर्य से काम लेना चाहिए| अगर माली एक दिन में सौ घड़े भी सींच लेगा तो भी फल तो ऋतु आने पर ही लगेंगे|
दोहा:- निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय
     बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय|
अर्थ:- कबीर जी कहते है कि निंदा करने वाले व्यक्तियों को अपने पास रखना चाहिए क्योंकि ऐसे व्यक्ति बिना पानी और साबुन के हमारे स्वभाव को स्वच्छ कर देते है|
दोहा:- माँगन मरण समान है, मति माँगो कोई भीख
माँगन ते मारना भला, यह सतगुरु की सीख|
अर्थ:- कबीरदास जी कहते कि माँगना मरने के समान है इसलिए कभी भी किसी से कुछ मत मांगो|
दोहा:- साईं इतना दीजिये, जा मे कुटुम समाय
     मैं भी भूखा न रहूँ, साधु ना भूखा जाय|
अर्थ:- कबीर दास जी कहते कि हे परमात्मा तुम मुझे केवल इतना दो कि जिसमे मेरे गुजरा चल जाये| मैं भी भूखा न रहूँ और अतिथि भी भूखे वापस न जाए|

दोहा:- दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करै न कोय
     जो सुख में सुमिरन करे, दुःख काहे को होय|
अर्थ:- कबीर कहते कि सुख में भगवान को कोई याद नहीं करता लेकिन दुःख में सभी भगवान से प्रार्थना करते है| अगर सुख में भगवान को याद किया जाये तो दुःख क्यों होगा|


दोहा:- तिनका कबहुँ ना निन्दिये, जो पाँवन तर होय
कबहुँ उड़ी आँखिन पड़े, तो पीर घनेरी होय।
अर्थ:- कबीर दास जी कहते है कभी भी पैर में आने वाले तिनके की भी निंदा नहीं करनी चाहिए क्योंकिं अगर वही तिनका आँख में चला जाए तो बहुत पीड़ा होगी|
दोहा:- साधू भूखा भाव का, धन का भूखा नाहिं
     धन का भूखा जी फिरै, सो तो साधू नाहिं।
अर्थ:- कबीर दास जी कहते कि साधू हमेशा करुणा और प्रेम का भूखा होता और कभी भी धन का भूखा नहीं होता| और जो धन का भूखा होता है वह साधू नहीं हो सकता|

दोहा:- माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर,
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।
अर्थ:- कबीर जी कहते है कि कुछ लोग वर्षों तक हाथ में लेकर माला फेरते है लेकिन उनका मन नहीं बदलता अर्थात् उनका मन सत्य और प्रेम की ओर नहीं जाता| ऐसे व्यक्तियों को माला छोड़कर अपने मन को बदलना चाहिए और सच्चाई के रास्ते पर चलना चाहिए|

दोहा:- जग में बैरी कोई नहीं, जो मन शीतल होय
यह आपा तो डाल दे, दया करे सब कोय।
अर्थ:- कबीर दास जी कहते है अगर हमारा मन शीतल है तो इस संसार में हमारा कोई बैरी नहीं हो सकता| अगर अहंकार छोड़ दें तो हर कोई हम पर दया करने को तैयार हो जाता है|
दोहा:- जैसा भोजन खाइये , तैसा ही मन होय
     जैसा पानी पीजिये, तैसी वाणी होय।
अर्थ:- कबीर दास जी कहते है कि हम जैसा भोजन करते है वैसा ही हमारा मन हो जाता है और हम जैसा पानी पीते है वैसी ही हमारी वाणी हो जाती है|
दोहा:- कुटिल वचन सबतें बुरा, जारि करै सब छार
     साधु वचन जल रूप है, बरसै अमृत धार।
अर्थ:- बुरे वचन विष के समान होते है और अच्छे वचन अमृत के समान लगते है|
दोहा:- जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ
     मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ|
अर्थ:- जो जितनी मेहनत करता है उसे उसका उतना फल अवश्य मिलता है| गोताखोर गहरे पानी में जाता है तो कुछ ले कर ही आता है, लेकिन जो डूबने के डर से किनारे पर ही बैठे रह जाते हैं वे कुछ नहीं कर पाते हैं|

जो होता है, अच्छे के लिए होता है – Moral Story

हमने यह बात कई बार सुनी होगी कि “हमारे साथ जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है – Whatever happens, happens for the Best|” लेकिन हम में से ज्यादात्तर लोग ऐसी बातों को सुन तो लेते है पर उन पर विश्वास (Believe)  नहीं करते|
हम में से ज्यादात्तर लोगों की समस्या यह नहीं है कि उन्हें अच्छी बातों (Good Thoughts) का ज्ञान नहीं है बल्कि समस्या यह है की उनको अच्छी बातों (Good Thoughts) का ज्ञान होने पर वह उन बातों पर विश्वास नहीं करते|

जो होता है, अच्छे के लिए होता है – Moral Story

अकबर बीरबल – Akbar Birbal 

एक बार शहंशाह अकबर (Akbar) एंव बीरबल (Birbal) शिकार पर गए और वहां पर शिकार करते समय अकबर की अंगुली कट गयी| अकबर को बहुत दर्द हो रहा था| पास में खड़े बीरबल( Birbal ) ने कहा – “कोई बात नहीं शहंशाह, जो भी होता है अच्छे के लिए ही होता है|” अकबर( Akbar ) को बीरबल की इस बात पर क्रोध आ गया और उसने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि बीरबल को महल ले जा कर कारागाह में डाल दिया जाये| सैनिकों ने बीरबल को बंधी बना कर कारागाह में डाल दिया एंव अकबर अकेले ही शिकार पर आगे निकल गए|
रास्ते में आदिवासियों ने जाल बिछा कर शहंशाह अकबर को बंधी बना लिया और अकबर की बली देने के लिए अपने मुखिया के पास ले गए|
जैसे ही मुखिया अकबर की बली चढाने के लिए आगे बढे तो किसी ने देखा कि अकबर की तो अंगुली कटी हुई है अर्थात् वह खंडित है इसलिए उसकी बली नहीं दी जा सकती और उन्होंने अकबर को मुक्त कर दिया| अकबर को अपनी गलती का अहसास हुआ एंव वह तुरंत बीरबल के पास पहुँचा| अकबर (Akbar) ने बीरबल को कारागाह से मुक्त किया एंव उसने बीरबल से माफ़ी मांगी कि उससे बहुत बड़ी भूल हो गयी जो उसने बीरबल (Birbal) जैसे ज्ञानी एंव दूरदृष्टि मित्र को बंधी बनाया| बीरबल ने फिर कहा – जो भी होता है अच्छे के लिए होता है| तो अकबर ने पूछा कि मेरे द्वारा तुमको बंधी बनाने में क्या अच्छा हुआ है?
बीरबल ने कहा, शहंशाह अगर आप मुझे बंधी न बनाते तो में आपके साथ शिकार पर चलता और आदिवासी मेरी बली दे देते| इस तरह बीरबल की यह बात सच हुई की जो भी होता है उसका अंतिम परिणाम अच्छा ही होता है|
दोस्त्तों यह कहानी (Moral Story) साबित करती है कि जो होता है, वह अच्छे के लिए ही होता है (Whatever happens, happens for good)| अच्छे का अर्थ उचित एंव न्यायपूर्ण परिणाम से है| दोस्तों अगर आपको ऐसे व्यक्ति के सम्बन्ध में न्याय करने के लिए बुलाया जाये जिसने कोई बुरा कार्य किया है तो आप क्या करेंगे? आप जरूर उसे ऐसी सजा देंगे या ऐसा कार्य करने को बोलेंगे जिससे कि उसको अपनी गलती का अहसास हो जाये और ऐसा करना ही सबसे न्यायपूर्ण एंव उचित होगा| दोस्तों अब प्रश्न उठता है कि सजा देने में उस व्यक्ति का क्या अच्छा हुआ जिसने कोई बुरा कार्य किया था? सजा देने में उस व्यक्ति का अच्छा ही हुआ है क्योंकि अगर उस व्यक्ति को इस बात का अहसास न हो कि उसने कुछ गलत किया है तो शायद वह व्यक्ति अपना सारा जीवन ऐसे ही बुरे कार्यो में व्यर्थ गँवा दे और जब उसके बाल सफ़ेद हो एंव दांत गिरने लगे तो इस बात पर पछताए की काश किसी ने उस वक्त सही रास्ता दिखा दिया होता तो यह जीवन (Life) व्यर्थ न जाता|

“शायद ही इस संसार में कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो मुसीबतों, कठिनाइयों, पराजय, मेहनत एंव गलतियों के बिना सफल हुआ हो| इसलिए हो सकता है कि आपकी मुसीबतें, कठिनाईयां, पराजय एंव गलतियाँ इस बात का सूचक है की आप जल्द ही सफल (Successful) होने वाले है|”

दोस्तों हमारे साथ भी हमेशा अच्छा ही होता है फर्क सिर्फ इस बात का है कि कुछ लोग इस बात पर विश्वास (Believe) करते है एंव हिम्मत नहीं हारते और यहीं दृढ़ निश्चय एंव विश्वास उनको सफलता (success) तक ले जाता है| वहीँ दूसरी ओर कुछ लोग ऐसी बातों पर विश्वास (Believe) नहीं करते एंव जल्द ही निराश (Disappointed) हो जाते है और यही निराशा उनको सफल (successful) होने से रोकती है|

निराशा की नींद से जागिये,
स्वंय से बात कीजिये – Talk To Yourself
कल कभी नहीं आएगा  – Tomorrow Never Comes
आगे बढिये, आज आपका है – Go Ahead, Today is Yours
आपको, आप स्वंय के अलावा दूसरा कोई नहीं रोक सकता – No One Can Stop You except Yourself

नरेन्द्र मोदी की सफलता का रहस्य – Narendra Modi Success Story

नाम – नरेन्द्र दामोदरदास मोदी| जन्म – 17 सितम्बर 1950| वर्तमान में सबसे चर्चित व्यक्ति| नरेन्द्र मोदी वाकई में एक लीडर है और उनके सामने सारी मुसीबतें कमजोर पड़ जाती है| यह उनका व्यक्तित्व ही है जिसके कारण आज वह भारत के प्रधानमंत्री (Prime Minister ) है और विश्व की निगाहें उन पर टिकी हुयी है| नरेन्द्र मोदी भारत के ज्यादातर व्यक्तियों के आदर्श बन गए है और उनके व्यक्तित्व की खूबियों का परिक्षण करके हम भी अपने व्यक्तित्व को उत्तम बना सकते है क्योंकि यह हमारा व्यक्तित्व एंव चरित्र ही होता है जो हमें सफल बनाता है|
तो आईये जानते है कि क्या है नरेन्द्र मोदी की सफलता का राज़:-

Success Mantra of Narendra Modi


  1. मेहनत (Hardwork):-

नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) की सफलता का सबसे बड़ा राज यही है कि वह बहुत ज्यादा मेहनत करते है| चुनाव के समय वह केवल 3-4 घंटे ही सोते थे एंव प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वह 18 घंटे कार्य करते है| मेहनत से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है एंव सफलता के सारे रास्ते खुल जाते है| यह मोदी की मेहनत ही है जिसके कारण एक चाय बेचने वाला आज भारत का प्रधानमंत्री है|

  1. आत्मविश्वास (self-confidence):-

Narendra Modi में गज़ब का आत्मविश्वास है| वह मुसीबतों से नहीं डरते और हमेशा प्रेरित एंव उत्साहित रहते है| आत्मविश्वास वहीँ होता है जहाँ किसी भी प्रकार का कोई “डर” नहीं होता|

  1. सही समय पर सही निर्णय (Right Decision at Right Time):-

Modi की टाइमिंग गज़ब की है एंव वे प्रत्येक अपना प्रत्येक decision सही समय पर लेते है| Decision जितना महत्वपूर्ण होता है उसकी timing भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है| Narendra Modi ने शपथ समारोह में सभी देशों के प्रमुखों को बुलाकर सही टाइम पर सही decision लिया| मोदी ने हवाई वादे नहीं किये एंव उनकी सरकार के पहले बजट में भी इसी बात पर जोर दिया गया कि सबसे पहले अधूरी योजनाओं को पूरा किया जायेगा| मोदी निरंतर अपने सांसदों के साथ मीटिंग करते है एंव उन्हें ज्यादा से ज्यादा समय संसद में बिताने, काम पर ध्यान देने एंव फालतू बयानबाजी से बचने की सलाह देते है|
  1. व्यवहारकुशलता एंव पहनावा :-

Modi की वाणी बुलंद है एंव उनके पास गज़ब की बोलने की कला है| Modi जब जनता के सामने बोलते है तो वे जनता की बात करते है और तेज आवाज से बोलते है एंव वे जब विदेशों के प्रमुखों के साथ बातचीत करते है तो बड़े आराम एंव शांतिपूर्ण तरीके के साथ बातचीत करते है|
Modi जहाँ भी जाते है वहां के हो जाते है| Modi जहाँ भी जाते है वहां की बात करते है, अगर वे राजस्थान जाते है तो राजस्थान की विशेषताओं की बात करते है एंव अगर वो नेपाल जाते है तो नेपाल की खूबसुरती की बात करते है| इसलिए उस क्षेत्र के लोगों को Modi अपने लगते है|
Modi अपने पहनावे पर विशेष ध्यान देते है एंव इसीलिए आज वे स्टाइल आइकॉन बन गए है एंव मार्केट में उनके स्टाइल के कपड़ों की विशेष डिमांड है|
  1. सकारात्मक एंव आशावादी (positive thinking):-

Modi सकारात्मक सोच रखते है एंव आशावादी बनने की सलाह देते है| वे एक motivational गुरु की तरह बात करते है एंव दूसरों को प्रेरित करते रहते है| वे कार्य को सकारात्मक रूप से शुरू करते है एंव उसे पूरा करने के लिए जी जान लगा देते है| Modi आलोचनाओं की परवाह नहीं करते एंव आलोचनाओं को मुंह तोड़ जवाब देते है| प्रधानमंत्री बनने के बाद Modi ने अपने सांसदों को सलाह दी की फालतू के विवादों में न पड़ें एंव प्रत्येक आलोचना का जवाब न दें|
  1. रचनात्मक सोच (Creative Thinking):-

Modi रचनात्मक रूप से सोचते है (Creative thinking) एंव रचनात्मकता को बढ़ावा देते है| वे हमेशा समस्याओं का समाधान, creative ideas के द्वारा करते है| उन्होंनेwww.mygov.nic.in website launch की ताकि वे जनता से सीधे जुड़ सकें एंव जनता के महत्वपूर्ण सुझाव उन्हें प्राप्त हो सके| Modi के चुनाव प्रचार का मुख्य साधन social media थी एंव यह उनकी creative thinking को दर्शाता है |

  1. भारत की बात करते है (India First):-

Narendra Modi अपनी पार्टी से ज्यादा भारत (India First) की बात करते है जो उन्हें अन्य पार्टियों के नेताओं से अलग बनाता है| नरेन्द्र मोदी जानते है कि अगर भारत मजबूत हुआ तो उनकी पार्टी स्वत: मजबूत हो जाएगी, लेकिन अन्य पार्टियों ने इस बात को नहीं समझा और उन्हें इसका खामियाजा लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ा| नरेन्द्र मोदी ने अपनी पार्टी को इस तरह से पेश किया है कि जनता के सामने उनसे अच्छा कोई विकल्प नहीं रहा |

  1. परिवर्तन को अपनाते है :-

अगर इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी की तुलना करें तो उनमे सबसे बड़ा फर्क यह है कि कांग्रेस ने अपना वही पुराना तरीका अपनाया एंव जनता की भावनाओं को समझ नहीं सकी लेकिन मोदी यह समझ गए कि जनता विकास चाहती है न की धर्म की राजनीती इसलिए Narendra Modi ने अपनी किसी भी रैली में धर्म सम्बन्धी बात नहीं की|

  1. सबको साथ लेकर चलते है :-

Modi का यह मंत्र “सबका साथ, सबका विकास” (SABAKA SATH, SABAKA VIKAS) आज अमेरिका को भी पसंद आ रहा है| मोदी हमेशा से ही सबको साथ लेकर चलने की कोशिश करते रहते है| हमेशा यह देखा गया है कि जब भी नयी सरकार बनती है तो मंत्री पद को लेकर हमेशा कोई न कोई मतभेद देखने को मिलते है लेकिन आज Modi की सरकार में आपस में कोई मतभेद नहीं है जबकि 2-3 वर्ष पूर्व बीजेपी में ही एक साथ कई मतभेद देखने को मिले थे| Modi की एक खास बात यह भी है की मतभेदों को बाहर आने से पूर्व ही वे उन्हें सुलझा देते है|

 10. अनुशासन (Discipline ) :-

Modi की जब से सरकार बनी है वे एक Professional CEO की तरह कार्य कर रहे है एंव अपने सांसदों की निरंतर class ले रहे है एंव उन्हें सख्त हिदायत दे रहे है कि सांसद, संसद की कार्यवाही में भाग ले एंव समय पर संसद पहुंचे| यह उनका अनुशासन ही था कि वे दिन में एक साथ 4-5 रैलियां करते थे एंव 18-20 घंटे मेहनत करते थे|

11. शारीरिक सक्षमता:-

मोदी एक फिट नेता है एंव वे इतनी ज्यादा मेहनत करने के बावजूद कभी भी थके हुए नहीं लगते| वे हमेशा आत्मविश्वास(Confidence) से भरे हुए रहते है एंव उनका energy level कभी कम नहीं होता|

आप क्या लेना पसंद करेंगे ? उदासी या मुस्कान Story of Buddha In Hindi

आप क्या लेना पसंद करेंगे ? उदासी या मुस्कान 

Story of Buddha In Hindi

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार विश्व में हर 40 सेकंड में एक व्यक्ति आत्महत्या करता है (One person dies by suicide every 40 seconds somewhere in the world). वही भारत में प्रत्येक दो मिनट में एक व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है और यह दर लगातार बढ़ रही है|
ज्यादातर बिमारियों जैसे ह्रदय रोग आदि की मुख्य वजह डिप्रेशन ही होता है| अगर व्यक्ति मानसिक तौर पर स्वास्थ्य है तो वह किसी भी परिस्थिति का सामना कर सकता है जैसा कि मशहूर क्रिकेटर युवराज सिंह ने कैंसर से लड़कर किया|
अगर हम लोगों से उनके डिप्रेशन या तनाव की वजह पूछेंगे तो 5 में से 4 व्यक्ति यही कहेंगे कि उनके तनाव एंव परेशानियों की वजह कोई दूसरा व्यक्ति है| ज्यादात्तर लोगों के तनाव की वजह उनकी भावनात्मक अक्षमता या सहनशीलता की कमी होती है लेकिन उन्हें यही लगता है कि उनके तनाव का कारण दूसरे व्यक्ति है|

गौतम बुद्ध के जीवन की प्रेरणादायक कहानी

Motivational Hindi Story of Gautam Buddha

एक बार गौतम बुद्ध किसी गाँव से गुजर रहे थे| उस गाँव के लोगों को गौतम बुद्ध के बारे में गलत धारणा थी जिस कारण वे बुद्ध को अपना दुश्मन मानते थे| जब गौतम बुद्ध गाँव में आये तो गाँव वालों ने बुद्ध को भला बुरा कहा और बदुआएं देने लगे|
गौतम बुद्ध गाँव वालों की बातें शांति से सुनते रहे और जब गाँव वाले बोलते बोलते थक गए तो बुद्ध ने कहा – “अगर आप सभी की बातें समाप्त हो गयी हो तो मैं प्रस्थान करूँ”
बुद्ध की बात सुनकर गाँव वालों को आश्चर्य हुआ| उनमें से एक व्यक्ति ने कहा – “हमने तुम्हारी तारीफ नहीं की है| हम तुम्हे बदुआएं दे रहे है| क्या तुम्हे कोई फर्क नहीं पड़ता????”
बुद्ध ने कहा – जाओ मैं आपकी गालियाँ नहीं लेता| आपके द्वारा गालियाँ देने से क्या होता है, जब तक मैं गालियाँ स्वीकार नहीं करता इसका कोई परिणाम नहीं होगा| कुछ दिन पहले एक व्यक्ति ने मुझे कुछ उपहार दिया था लेकिन मैंने उस उपहार को लेने से मना कर दिया तो वह व्यक्ति उपहार को वापस ले गया| जब मैं लूंगा ही नहीं तो कोई मुझे कैसे दे पाएगा|
बुद्ध ने बड़ी विनम्रता से पूछा – अगर मैंने उपहार नहीं लिया तो उपहार देने वाले व्यक्ति ने क्या किया होगा|
भीड़ में से किसी ने कहा – उस उपहार को व्यक्ति ने अपने पास रख दिया होगा|
बुद्ध ने कहा – मुझे आप सब पर बड़ी दया आती है क्योंकि मैं आपकी इन गालियों को लेने में असमर्थ हूँ और इसलिए आपकी यह गालियाँ आपके पास ही रह गयी है|  

दोस्तों भगवान गौतम बुद्ध के जीवन की यह छोटी सी कहानी हमारे जीवन में एक बड़ा बदलाव ला सकती है क्योंकि हम में से ज्यादात्तर लोग यही समझते है कि हमारे दुखों का कारण दूसरे व्यक्ति है| हमारी परेशानियों या दुखों की वजह कोई अन्य व्यक्ति नहीं हो सकता और अगर हम ऐसा मानते है कि हमारी परेशानियों की वजह कोई अन्य व्यक्ति है तो हम अपनी स्वंय पर नियंत्रण की कमी एंव भावनात्मक अक्षमता को अनदेखा करते है|
यह हम पर निर्भर करता है कि हम दूसरों के द्वारा प्रदान की गयी नकारात्मकता को स्वीकार करते है या नहीं| अगर हम नकारात्मकता को स्वीकार करते है तो हम स्वंय के पैर पर कुल्हाड़ी मारते है|